कैसी है ये लहरे...जो रह रह के उमड़ रही है....
भावनाओ में बह के बहार आने को तड़प रही है..
न मिला गर इन्हे शब्दों का स्वरुप तो....
आँखों से बह निकलेगी...रोकू गर उन्हें
तो जुबा कह उठेगी...
बह जाने दो मुझे आज....न रोको...
रूप न देखो मेरा...बस आज बह जाने दो...
भावनाओ में बह के बहार आने को तड़प रही है..
न मिला गर इन्हे शब्दों का स्वरुप तो....
आँखों से बह निकलेगी...रोकू गर उन्हें
तो जुबा कह उठेगी...
बह जाने दो मुझे आज....न रोको...
रूप न देखो मेरा...बस आज बह जाने दो...