क्यों अचानक से
एक अनजान सी
आहट होती है
भीतर में...
कभी डर तो कभी
घबराहट सी होती है
भीतर में।
चौंक जाना
हकीकत में
तो कभी ख्वाबो में
काँप जाना
क्यों होता है
ऐसा कई बार
मेरे भीतर में।
लाख कोशिशों के
बावजूद भी
समज नहीं पायी
मै उस घबराहट
और अनजाने से
भय की वजह
भीतर में...
क्या किसी अनहोनी
की है ये आशंका
भीतर में...
या फिर किसी
दबे हुए दर्द की
है ये तीव्रता
भीतर में...
जितना ज्यादा
समजाती खुद को
उतनी ज्यादा डरती
भीतर में...
न जाने कब होगी
असीम शांति मेरे इस
अशांत भीतर में...
रविवार, 8 मार्च 2009
जिन्दगी के मोड़
ये जिन्दगी के मोड...
ये ऊँचे चढाव
ये ढलते उतार...
कभी हँसते तो
कभी आंसू भरी आँखों से
उमीदो को ताकते ये पल
तो कभी फिसलती खुशिया
आँखों से गालो के रास्ते...
ये सब मेरे साथ है
हमेशा से,आज तक!
आगे पता नहीं
होंगे या नहीं...
कैसे रह पाऊँगी मै
इन सब के बिना
ये सब तो मेरे अपने है...
दिल के बहोत करीब है...
जिन्दगी का है एक हिस्सा
जुडा है इनसे हर एक किस्सा
इनसे बिछड़ के
जी नहीं सकती मै
किसी ने साथ दिया न दिया...
लेकिन इन्होने मेरा साथ
कभी नहीं छोडा...
न सुख में और
ना ही दुःख में॥
पल पल जिसके साथ
वक़्त बिताया मैंने
उन अहसासों के बिना
खुद को सोच ना भी
मुश्किल लगता है
ज़माने भर की मुस्कान
इन के लिए है कुर्बान!
ये है बने मेरे लिए
और मै इनके लिए!!।
ये ऊँचे चढाव
ये ढलते उतार...
कभी हँसते तो
कभी आंसू भरी आँखों से
उमीदो को ताकते ये पल
तो कभी फिसलती खुशिया
आँखों से गालो के रास्ते...
ये सब मेरे साथ है
हमेशा से,आज तक!
आगे पता नहीं
होंगे या नहीं...
कैसे रह पाऊँगी मै
इन सब के बिना
ये सब तो मेरे अपने है...
दिल के बहोत करीब है...
जिन्दगी का है एक हिस्सा
जुडा है इनसे हर एक किस्सा
इनसे बिछड़ के
जी नहीं सकती मै
किसी ने साथ दिया न दिया...
लेकिन इन्होने मेरा साथ
कभी नहीं छोडा...
न सुख में और
ना ही दुःख में॥
पल पल जिसके साथ
वक़्त बिताया मैंने
उन अहसासों के बिना
खुद को सोच ना भी
मुश्किल लगता है
ज़माने भर की मुस्कान
इन के लिए है कुर्बान!
ये है बने मेरे लिए
और मै इनके लिए!!।
शनिवार, 24 जनवरी 2009
आज बह जाने दो..मुझे न रोको !
कैसी है ये लहरे...जो रह रह के उमड़ रही है....
भावनाओ में बह के बहार आने को तड़प रही है..
न मिला गर इन्हे शब्दों का स्वरुप तो....
आँखों से बह निकलेगी...रोकू गर उन्हें
तो जुबा कह उठेगी...
बह जाने दो मुझे आज....न रोको...
रूप न देखो मेरा...बस आज बह जाने दो...
भावनाओ में बह के बहार आने को तड़प रही है..
न मिला गर इन्हे शब्दों का स्वरुप तो....
आँखों से बह निकलेगी...रोकू गर उन्हें
तो जुबा कह उठेगी...
बह जाने दो मुझे आज....न रोको...
रूप न देखो मेरा...बस आज बह जाने दो...
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