रविवार, 8 मार्च 2009

मेरे भीतर में...

क्यों अचानक से
एक अनजान सी
आहट होती है
भीतर में...
कभी डर तो कभी
घबराहट सी होती है
भीतर में।
चौंक जाना
हकीकत में
तो कभी ख्वाबो में
काँप जाना
क्यों होता है
ऐसा कई बार
मेरे भीतर में।
लाख कोशिशों के
बावजूद भी
समज नहीं पायी
मै उस घबराहट
और अनजाने से
भय की वजह
भीतर में...
क्या किसी अनहोनी
की है ये आशंका
भीतर में...
या फिर किसी
दबे हुए दर्द की
है ये तीव्रता
भीतर में...
जितना ज्यादा
समजाती खुद को
उतनी ज्यादा डरती
भीतर में...
न जाने कब होगी
असीम शांति मेरे इस
अशांत भीतर में...

1 टिप्पणी:

  1. bahot khoob ... aisa aksar humey bhi hota hai...janey kesa hota hai ... bheetar bhoochal hota hai...dil mein hulchul hoti hai...kabhi banjar hota hai..kabhi jalthal hota hai...janey kya kuch hota hai...bheetar kch kch hota hai....

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